मैं क्रोध हूँ मैं प्रेम à¤ी ||ध्रु||
व्याल का गरल à¤ी मैं |
पंक मैं, कमल à¤ी मैं
विष à¤ी मैं, पियूष à¤ी मैं ||१||
हूँ रघुपति सा धैर्यवान |
कर्ण की व्याकुलता
हूँ सीता की शालीनता ||२||
कृष्ण का हूँ हास्य मैं |
मैं अंत हूँ अनंत à¤ी |
मैं क्रोध हूँ मैं प्रेम à¤ी ||३||
जिंदगी नवरस में हैं ||
२) व्याल: साप, सर्प;
३) पंक: कीचड़;
४) पियूष: अमृत;
५) उन्माद: अहंकार




